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ramayan 7.12.14-15: मयासुर की यह बात सुनकर राक्षस रावण ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया, 'मैं पुलस्त्य के पुत्र विश्रवा का पुत्र हूँ। मेरा नाम दशग्रीव है। जिन विश्रवा ऋषि से मैं उत्पन्न हुआ हूँ, वे ब्रह्मा की तीसरी पीढ़ी में उत्पन्न हुए थे।'॥14-15॥   |   ramayan सर्ग 7.12: शूर्पणखा तथा रावण आदि तीनों भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 12: शूर्पणखा तथा रावण आदि तीनों भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  7.12.14-15 
एवमुक्तं तु तद् रक्षो विनीतमिदमब्रवीत्॥ १४॥
अहं पौलस्त्यतनयो दशग्रीवश्च नामत:।
मुनेर्विश्रवसो यस्तु तृतीयो ब्रह्मणोऽभवत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मयासुर की यह बात सुनकर राक्षस रावण ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया, 'मैं पुलस्त्य के पुत्र विश्रवा का पुत्र हूँ। मेरा नाम दशग्रीव है। जिन विश्रवा ऋषि से मैं उत्पन्न हुआ हूँ, वे ब्रह्मा की तीसरी पीढ़ी में उत्पन्न हुए थे।'॥14-15॥
 
On hearing Mayasura say this, the demon Ravana humbly replied, 'I am the son of Vishrava, the son of Pulastya. My name is Dashagriva. The sage Vishrava from whom I was born was born in the third generation from Brahma.'॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)