श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 12: शूर्पणखा तथा रावण आदि तीनों भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.12.11-12h 
भर्तारमनया सार्धमस्या: प्राप्तोऽस्मि मार्गितुम्।
कन्यापितृत्वं दु:खं हि सर्वेषां मानकांक्षिणाम्॥ ११॥
कन्या हि द्वे कुले नित्यं संशये स्थाप्य तिष्ठति।
 
 
अनुवाद
'मैं उसके लिए एक योग्य वर ढूँढ़ने उसके साथ आया हूँ। बेटी का पिता होना लगभग सभी कन्या-इच्छुक लोगों के लिए कष्टकारी होता है। (क्योंकि इसके लिए कन्या के पिता को दूसरों के आगे झुकना पड़ता है।) कन्या सदैव दो परिवारों को संशय में रखती है।'
 
‘I have come with her to find a suitable husband for her. Being the father of a daughter is troublesome for almost all the people who desire a girl. (Because for this the father of the girl has to bow down before others.) The girl always keeps two families in doubt. 11 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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