श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.111.9 
रामायणं गोविसर्गे मध्याह्ने वा समाहित:।
सायाह्ने वापराह्णे च वाचयन् नावसीदति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो प्रतिदिन प्रातः, मध्याह्न, सायंकाल अथवा रात्रि में पूर्ण एकाग्रता से रामायण का पाठ करता है, उसे कभी कोई दुःख नहीं होता ॥9॥
 
He who recites the Ramayana with full concentration every day in the morning, noon, afternoon or evening, never faces any sorrow. ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)