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श्लोक 6
श्लोक
7.111.6
पापान्यपि च य: कुर्यादहन्यहनि मानव:।
पठत्येकमपि श्लोकं पापात् स परिमुच्यते॥ ६॥
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन पाप करता है, वह भी यदि इस श्लोक का एक भी श्लोक प्रतिदिन पढ़े, तो वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥6॥
Even a person who commits sins every day, if he recites even one verse of this verse daily, becomes free from all his sins. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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