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श्लोक 5
श्लोक
7.111.5
अपुत्रो लभते पुत्रमधनो लभते धनम्।
सर्वपापै: प्रमुच्येत पादमप्यस्य य: पठेत्॥ ५॥
अनुवाद
इसका पाठ करने से निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन की प्राप्ति होती है। जो कोई प्रतिदिन इसका एक श्लोक भी पढ़ता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥5॥
By reciting this, the childless get a son and the poor get wealth. Whoever recites even one verse of this verse every day, gets rid of all sins. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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