Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.111.23: श्री राघवेन्द्र का यह चरित्र सदैव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। अतः मनुष्य को प्रतिदिन यत्नपूर्वक इस उत्तम काव्य का श्रवण करना चाहिए। 23॥   |   ramayan सर्ग 7.111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.111.23 
चतुर्वर्गप्रदं नित्यं चरितं राघवस्य तु।
तस्माद् यत्नवता नित्यं श्रोतव्यं परमं सदा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
श्री राघवेन्द्र का यह चरित्र सदैव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। अतः मनुष्य को प्रतिदिन यत्नपूर्वक इस उत्तम काव्य का श्रवण करना चाहिए। 23॥
 
This character of Shri Raghavendra is always the one who gives all the four efforts namely Dharma, Artha, Kama and Moksha. Therefore, one should listen to this excellent poetry diligently every day. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)