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ramayan 7.111.20: जो मनुष्य कल्याण की इच्छा रखता है, उसे श्री रघुनाथजी का निरन्तर चिन्तन करना चाहिए। इस प्रबन्धकाव्य को प्रतिदिन ब्राह्मणों को सुनाना चाहिए। 20॥   |   ramayan सर्ग 7.111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.111.20 
चिन्तयेद् राघवं नित्यं श्रेय: प्राप्तुं य इच्छति।
श्रावयेदिदमाख्यानं ब्राह्मणेभ्यो दिने दिने॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य कल्याण की इच्छा रखता है, उसे श्री रघुनाथजी का निरन्तर चिन्तन करना चाहिए। इस प्रबन्धकाव्य को प्रतिदिन ब्राह्मणों को सुनाना चाहिए। 20॥
 
One who desires to attain welfare, should think about Shri Raghunathji continuously. This Prabandhakavya should be recited daily to Brahmins. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)