श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.111.15-16h 
सम्यक‍्श्रद्धासमायुक्त: शृणुते राघवीं कथाम्॥ १५॥
सर्वपापात् प्रमुच्येत विष्णुलोकं स गच्छति।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बड़ी श्रद्धा से श्री रघुनाथजी की कथा सुनता है, वह सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को जाता है ॥15 1/2॥
 
One who has great faith and listens to the story of Shri Raghunathji, becomes free from all sins and goes to Vishnuloka. 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)