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श्लोक 15-16h
श्लोक
7.111.15-16h
सम्यक्श्रद्धासमायुक्त: शृणुते राघवीं कथाम्॥ १५॥
सर्वपापात् प्रमुच्येत विष्णुलोकं स गच्छति।
अनुवाद
जो मनुष्य बड़ी श्रद्धा से श्री रघुनाथजी की कथा सुनता है, वह सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को जाता है ॥15 1/2॥
One who has great faith and listens to the story of Shri Raghunathji, becomes free from all sins and goes to Vishnuloka. 15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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