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ramayan 7.111.13-14h: इस संसार में जिसने रामायण की कथा सुन ली, उसने मानो प्रयाग जैसे तीर्थों, गंगा जैसी पवित्र नदियों, नैमिषारण्य जैसे वनों और कुरुक्षेत्र जैसे पुण्य क्षेत्रों की यात्रा पूरी कर ली है ॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.111.13-14h 
प्रयागादीनि तीर्थानि गङ्गाद्या: सरितस्तथा।
नैमिषादीन्यरण्यानि कुरुक्षेत्रादिकान्यपि॥ १३॥
गतानि तेन लोकेऽस्मिन् येन रामायणं श्रुतम्।
 
 
अनुवाद
इस संसार में जिसने रामायण की कथा सुन ली, उसने मानो प्रयाग जैसे तीर्थों, गंगा जैसी पवित्र नदियों, नैमिषारण्य जैसे वनों और कुरुक्षेत्र जैसे पुण्य क्षेत्रों की यात्रा पूरी कर ली है ॥13 1/2॥
 
One who has heard the story of Ramayana in this world, it is as if he has completed the journey of pilgrimages like Prayag, holy rivers like Ganga, forests like Naimisharanya and virtuous areas like Kurukshetra. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)