Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.111.12: इस काव्य के एक स्कन्ध के श्रवण मात्र से मनुष्य को एक हजार अश्वमेध और दस हजार वाजपेय यज्ञों का फल प्राप्त होता है॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.111.12 
अश्वमेधसहस्रस्य वाजपेयायुतस्य च।
लभते श्रवणादेव सर्गस्यैकस्य मानव:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस काव्य के एक स्कन्ध के श्रवण मात्र से मनुष्य को एक हजार अश्वमेध और दस हजार वाजपेय यज्ञों का फल प्राप्त होता है॥12॥
 
By merely listening to one canto of this poem a person attains the fruits of one thousand Ashwamedha and ten thousand Vajpayee Yagyas.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)