श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.111.11 
एतदाख्यानमायुष्यं सभविष्यं सहोत्तरम्।
कृतवान् प्रचेतस: पुत्रस्तद् ब्रह्माप्यन्वमन्यत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
प्रचेता के पुत्र महर्षि वाल्मीकि ने अश्वमेध यज्ञ की समाप्ति पर कथा और उत्तरकाण्ड सहित रामायण नामक इस ऐतिहासिक काव्य की रचना की है। ब्रह्माजी ने भी इसका अनुमोदन किया था। 11॥
 
Maharishi Valmiki, son of Pracheta, has created this historical poem called Ramayana including the story and Uttarkanda after the completion of Ashwamedha Yagya. Lord Brahma had also approved this. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)