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ramayan 7.110.28: इस प्रकार वहाँ आये हुए समस्त जीवों को बालकों के लोकों में स्थान देकर लोकगुरु ब्रह्माजी हर्ष और प्रसन्नता से भरे हुए देवताओं के साथ अपने महान धाम को चले गये।   |   ramayan सर्ग 7.110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.110.28 
तत: समागतान् सर्वान् स्थाप्य लोकगुरुर्दिवि।
हृष्टै: प्रमुदितैर्देवैर्जगाम त्रिदिवं महत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वहाँ आये हुए समस्त जीवों को बालकों के लोकों में स्थान देकर लोकगुरु ब्रह्माजी हर्ष और प्रसन्नता से भरे हुए देवताओं के साथ अपने महान धाम को चले गये।
 
In this way, after giving place to all the living beings who had come there in the children's worlds, Lokguru Brahmaji went to his great abode along with the gods filled with joy and happiness.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे दशाधिकशततम: सर्ग: ॥ १ १०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें एक सौ दसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ १०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)