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ramayan 7.110.27: उस समय जो भी रीछ, वानर या राक्षस वहाँ आए, वे सब सरयू के जल में अपने शरीर डुबोकर प्रभु के परम धाम को पहुँच गए॥27॥   |   ramayan सर्ग 7.110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.110.27 
तस्मिन् येऽपि समापन्ना ऋक्षवानरराक्षसा:।
तेऽपि स्वर्गं प्रविविशुर्देहान् निक्षिप्य चाम्भसि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस समय जो भी रीछ, वानर या राक्षस वहाँ आए, वे सब सरयू के जल में अपने शरीर डुबोकर प्रभु के परम धाम को पहुँच गए॥27॥
 
At that time, whatever bears, monkeys or demons happened to come there, they all immersed their bodies in the water of Saryu and reached the supreme abode of the Lord. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)