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ramayan 7.11.46: ऋषि की यह बात सुनकर कुबेर ने अपने पिता के प्रति आदर रखते हुए उनकी बात मान ली और अपनी पत्नी, पुत्र, मंत्रियों, वाहन और धन को साथ लेकर लंका से कैलाश के लिए प्रस्थान कर गए।   |   ramayan सर्ग 7.11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.11.46 
एवमुक्तो गृहीत्वा तु तद्वच: पितृगौरवात्।
सदारपुत्र: सामात्य: सवाहनधनो गत:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
ऋषि की यह बात सुनकर कुबेर ने अपने पिता के प्रति आदर रखते हुए उनकी बात मान ली और अपनी पत्नी, पुत्र, मंत्रियों, वाहन और धन को साथ लेकर लंका से कैलाश के लिए प्रस्थान कर गए।
 
On hearing the sage say this, Kubera, out of respect for his father, accepted his words and taking along with him his wife, son, ministers, vehicle and wealth, he left Lanka for Kailash.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)