श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  7.11.27-28 
प्रेषितोऽहं तव भ्रात्रा दशग्रीवेण सुव्रत।
त्वत्समीपं महाबाहो सर्वशस्त्रभृतां वर॥ २७॥
तच्छ्रूयतां महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद।
वचनं मम वित्तेश यद् ब्रवीति दशानन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले, समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, समस्त शास्त्रों के ज्ञाता, महाबाहु, परम बुद्धिमान धनेश्वर! आपके भाई दशग्रीव ने मुझे आपके पास भेजा है। दशमुख रावण आपसे जो कहना चाहता है, वह मैं आपको बता रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनें॥ 27-28॥
 
O follower of the best vows, the best among all weapon holders, expert in all scriptures, mighty-armed, highly intelligent Dhaneshwar! Your brother Dashagriva has sent me to you. I am telling you what Dashmukh Ravana wants to say to you. Please listen to me.॥ 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)