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ramayan 7.11.12-13: तदनन्तर कुछ काल व्यतीत होने पर अपने स्थान पर निवास करते हुए दशग्रीव रावण से, जिसने सुमाली को पूर्वोक्त उत्तर पहले ही दे दिया था, रात्रिकालीन प्रहस्त ने विनयपूर्वक यह युक्तियुक्त बात कही -॥12-13॥   |   ramayan सर्ग 7.11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  7.11.12-13 
कस्यचित् त्वथ कालस्य वसन्तं रावणं तत:॥ १२॥
उक्तवन्तं तथा वाक्यं दशग्रीवं निशाचर:।
प्रहस्त: प्रश्रितं वाक्यमिदमाह सकारणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर कुछ काल व्यतीत होने पर अपने स्थान पर निवास करते हुए दशग्रीव रावण से, जिसने सुमाली को पूर्वोक्त उत्तर पहले ही दे दिया था, रात्रिकालीन प्रहस्त ने विनयपूर्वक यह युक्तियुक्त बात कही -॥12-13॥
 
Thereafter, after some time had passed, while residing at his place, to Dashagreeva Ravana, who had already given the aforesaid answer to Sumali, the night-time Prahasta politely said the following logical thing -॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)