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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 109: परमधाम जाने के लिये निकले हुए श्रीराम के साथ समस्त अयोध्या वासियों का प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.109.17 
न तत्र कश्चिद् दीनो वा व्रीडितो वापि दु:खित:।
हृष्टं समुदितं सर्वं बभूव परमाद्भुतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनमें से कोई भी दुखी या शर्मिंदा नहीं था। वहाँ एकत्रित सभी लोगों के हृदय में अपार आनंद था और इस प्रकार भीड़ अत्यंत अद्भुत लग रही थी।
 
There was no one among them who was sad or ashamed. There was immense joy in the hearts of all the people gathered there and thus the crowd looked extremely amazing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)