Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.109.14-15: आरोग्य से परिपूर्ण समस्त प्रजाजन श्री रघुनाथजी के गुणों से मोहित हो गए; अतः वे नर, नारी, पशु, पक्षी और सगे-संबंधियों सहित उस महान यात्रा में श्री राम के पीछे-पीछे चले। वे सबके हृदय में प्रसन्नता थी और पाप से मुक्त थे॥14-15॥   |   ramayan सर्ग 7.109: परमधाम जाने के लिये निकले हुए श्रीराम के साथ समस्त अयोध्या वासियों का प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 109: परमधाम जाने के लिये निकले हुए श्रीराम के साथ समस्त अयोध्या वासियों का प्रस्थान  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  7.109.14-15 
तत: सर्वा: प्रकृतयो हृष्टपुष्टजनावृता:।
गच्छन्तमनुगच्छन्ति राघवं गुणरञ्जिता:॥ १४॥
तत: सस्त्रीपुमांसस्ते सपक्षिपशुबान्धवा:।
राघवस्यानुगा: सर्वे हृष्टा विगतकल्मषा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आरोग्य से परिपूर्ण समस्त प्रजाजन श्री रघुनाथजी के गुणों से मोहित हो गए; अतः वे नर, नारी, पशु, पक्षी और सगे-संबंधियों सहित उस महान यात्रा में श्री राम के पीछे-पीछे चले। वे सबके हृदय में प्रसन्नता थी और पाप से मुक्त थे॥14-15॥
 
All the people, full of healthy people, were fascinated by the qualities of Shri Raghunathji; Therefore, he along with men, women, animals, birds and relatives followed Shri Ram in that great journey. They all had happiness in their hearts and were free from sin. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)