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ramayan 7.108.7-8: अपने कुल में भयंकर नरसंहार होने की बात सुनकर रघुनन्दन शत्रुघ्न ने समस्त प्रजाजनों तथा कांचन नामक पुरोहित को बुलाया और उन्हें सारा वृत्तान्त यथावत् सुनाया ॥ 7-8॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  7.108.7-8 
तच्छ्रुत्वा घोरसंकाशं कुलक्षयमुपस्थितम्॥ ७॥
प्रकृतीस्तु समानीय काञ्चनं च पुरोधसम्।
तेषां सर्वं यथावृत्तमब्रवीद् रघुनन्दन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अपने कुल में भयंकर नरसंहार होने की बात सुनकर रघुनन्दन शत्रुघ्न ने समस्त प्रजाजनों तथा कांचन नामक पुरोहित को बुलाया और उन्हें सारा वृत्तान्त यथावत् सुनाया ॥ 7-8॥
 
On hearing that a dreadful massacre was imminent in his clan, Raghunandan Shatrughna called together all the people and a priest named Kanchan and narrated the whole incident to them as it happened. ॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)