Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.108.35-36h: प्रभु! जब तक आपकी पवित्र कथा संसार में प्रसारित होती रहेगी, तब तक मैं आपकी आज्ञा का पालन करते हुए इस पृथ्वी पर रहूँगा।’ ॥35 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.108.35-36h 
यावत् तव कथा लोके विचरिष्यति पावनी॥ ३५॥
तावत् स्थास्यामि मेदिन्यां तवाज्ञामनुपालयन्।
 
 
अनुवाद
प्रभु! जब तक आपकी पवित्र कथा संसार में प्रसारित होती रहेगी, तब तक मैं आपकी आज्ञा का पालन करते हुए इस पृथ्वी पर रहूँगा।’ ॥35 1/2॥
 
Lord! As long as your holy story is spread in the world, I will remain on this earth obeying your orders.' ॥ 35 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)