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ramayan 7.108.34-35h: महात्मा श्री रघुनाथ जी के ऐसा कहने पर हनुमान जी बहुत प्रसन्न हुए और वे इस प्रकार बोले-॥34 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.108.34-35h 
एवमुक्तस्तु हनुमान् राघवेण महात्मना॥ ३४॥
वाक्यं विज्ञापयामास परं हर्षमवाप च।
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री रघुनाथ जी के ऐसा कहने पर हनुमान जी बहुत प्रसन्न हुए और वे इस प्रकार बोले-॥34 1/2॥
 
Hanuman ji became very happy when Mahatma Sri Raghunath ji said this and he spoke thus -॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)