Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.108.32-33h: विभीषण से ऐसा कहकर श्री रामचंद्रजी ने हनुमानजी से कहा - 'तुमने दीर्घकाल तक जीने का निश्चय किया है। अपनी प्रतिज्ञा को व्यर्थ मत करो।'   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.108.32-33h 
तमेवमुक्त्वा काकुत्स्थो हनूमन्तमथाब्रवीत्॥ ३२॥
जीविते कृतबुद्धिस्त्वं मा प्रतिज्ञां वृथा कृथा:।
 
 
अनुवाद
विभीषण से ऐसा कहकर श्री रामचंद्रजी ने हनुमानजी से कहा - 'तुमने दीर्घकाल तक जीने का निश्चय किया है। अपनी प्रतिज्ञा को व्यर्थ मत करो।'
 
Having said this to Vibhishan, Shri Ramchandraji said to Hanumanji - 'You have decided to live for a long time. Do not waste your pledge. 32 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)