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ramayan 7.108.31-32h: राक्षसराज विभीषण ने श्री रघुनाथजी की यह आज्ञा हृदय से ग्रहण की और 'बहुत अच्छा' कहकर उसे स्वीकार कर लिया॥31 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.108.31-32h 
तथेति प्रतिजग्राह रामवाक्यं विभीषण:॥ ३१॥
राजा राक्षसमुख्यानां राघवाज्ञामनुस्मरन्।
 
 
अनुवाद
राक्षसराज विभीषण ने श्री रघुनाथजी की यह आज्ञा हृदय से ग्रहण की और 'बहुत अच्छा' कहकर उसे स्वीकार कर लिया॥31 1/2॥
 
The demon king Vibhishana took this command of Sri Raghunatha to heart and accepted it, saying 'very good'. ॥ 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)