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ramayan 7.108.27: हे महाबली राक्षसराज विभीषण! जब तक संसार के लोग जीवित रहेंगे, तब तक तुम भी लंका में रहकर अपने शरीर का पालन करोगे॥27॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.108.27 
यावत् प्रजा धरिष्यन्ति तावत् त्वं वै विभीषण।
राक्षसेन्द्र महावीर्य लङ्कास्थ: स्वं धरिष्यसि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली राक्षसराज विभीषण! जब तक संसार के लोग जीवित रहेंगे, तब तक तुम भी लंका में रहकर अपने शरीर का पालन करोगे॥27॥
 
The mighty demon king Vibhishana! As long as the people of the world continue to live, you too will live in Lanka and maintain your body. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)