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ramayan 7.108.26: पूर्वोक्त वानरों और राक्षसों के वचन सुनकर यशस्वी श्री रघुनाथजी ने मुस्कुराकर ‘बहुत अच्छा’ कहकर राक्षसराज विभीषण से कहा-॥26॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.108.26 
तैरेवमुक्त: काकुत्स्थो बाढमित्यब्रवीत् स्मयन्।
विभीषणमथोवाच राक्षसेन्द्रं महायशा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पूर्वोक्त वानरों और राक्षसों के वचन सुनकर यशस्वी श्री रघुनाथजी ने मुस्कुराकर ‘बहुत अच्छा’ कहकर राक्षसराज विभीषण से कहा-॥26॥
 
Having heard the words of the aforesaid monkeys and demons, the illustrious Sri Raghunatha smiled and said 'Very good' and said to the demon king Vibhishana -॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)