Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.108.25: हे सुग्रीव! मेरी बात सुनो। तुम्हारे बिना मैं स्वर्ग या परमधाम भी नहीं जा सकता।॥25॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.108.25 
सखे शृणुष्व सुग्रीव न त्वयाहं विनाकृत:।
गच्छेयं देवलोकं वा परमं वा पदं महत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे सुग्रीव! मेरी बात सुनो। तुम्हारे बिना मैं स्वर्ग या परमधाम भी नहीं जा सकता।॥25॥
 
Friend Sugreeva! Listen to me. Without you I cannot go to the heaven or even to the supreme abode or the supreme abode.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)