Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.108.24: उसके वचन सुनकर सुखों में श्रेष्ठ श्री रामजी ने वानरराज सुग्रीव की मित्रता का विचार करके उससे कहा -॥24॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.108.24 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा रामो रमयतां वर:।
वानरेन्द्रमथोवाच मैत्रं तस्यानुचिन्तयन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उसके वचन सुनकर सुखों में श्रेष्ठ श्री रामजी ने वानरराज सुग्रीव की मित्रता का विचार करके उससे कहा -॥24॥
 
On hearing his words, Sri Rama, the best of those who delight in pleasures, thinking about the friendship of the monkey king Sugreeva, said to him -॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)