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ramayan 7.108.23: हे मनुष्यों के स्वामी! मैं वीर अंगद को राजा बनाकर आया हूँ। कृपया समझ लीजिए कि मैं भी आपके साथ चलने को उद्यत हूँ।॥23॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.108.23 
अभिषिच्याङ्गदं वीरमागतोऽस्मि नरेश्वर।
तवानुगमने राजन् विद्धि मां कृतनिश्चयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मैं वीर अंगद को राजा बनाकर आया हूँ। कृपया समझ लीजिए कि मैं भी आपके साथ चलने को उद्यत हूँ।॥23॥
 
Lord of men! I have come after crowning the brave Angad as the king. Please understand that I am also determined to accompany you.'॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)