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ramayan 7.108.22: इतने में महाबली सुग्रीव वीर श्री रामजी को विधिपूर्वक प्रणाम करके अपना अभिप्राय प्रकट करने को तत्पर हो गए और बोले - ॥22॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.108.22 
एतस्मिन्नन्तरे रामं सुग्रीवोऽपि महाबल:।
प्रणम्य विधिवद् वीरं विज्ञापयितुमुद्यत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इतने में महाबली सुग्रीव वीर श्री रामजी को विधिपूर्वक प्रणाम करके अपना अभिप्राय प्रकट करने को तत्पर हो गए और बोले - ॥22॥
 
Meanwhile the mighty Sugreeva, having bowed down to the brave Sri Rama in a proper manner, became ready to express his intention and said - ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)