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ramayan 7.108.19-20h: उनमें से कुछ देवताओं के पुत्र थे, कुछ ऋषियों की संतान थे और कुछ गन्धर्वों के गर्भ से उत्पन्न हुए थे। श्री रघुनाथजी के लीला संवरण का समय जानकर वे सभी वहाँ आये थे। पूर्वोक्त सभी वानरों और राक्षसों ने श्री राम को प्रणाम करके कहा-॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.108.19-20h 
देवपुत्रा ऋषिसुता गन्धर्वाणां सुतास्तथा।
रामक्षयं विदित्वा ते सर्व एव समागता:॥ १९॥
ते राममभिवाद्योचु: सर्वे वानरराक्षसा:।
 
 
अनुवाद
उनमें से कुछ देवताओं के पुत्र थे, कुछ ऋषियों की संतान थे और कुछ गन्धर्वों के गर्भ से उत्पन्न हुए थे। श्री रघुनाथजी के लीला संवरण का समय जानकर वे सभी वहाँ आये थे। पूर्वोक्त सभी वानरों और राक्षसों ने श्री राम को प्रणाम करके कहा-॥19 1/2॥
 
Some of them were sons of gods, some were children of sages and some were born of Gandharvas. Knowing the time of Shri Raghunath's Leela Samvaran, all of them had come there. All the aforesaid monkeys and demons bowed to Shri Ram and said -॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)