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ramayan 7.108.17: उनके यह कहते ही बहुत से वानर, भालू और राक्षस, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे, वहाँ आ पहुँचे ॥17॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.108.17 
तस्य वाक्यस्य वाक्यान्ते वानरा: कामरूपिण:।
ऋक्षराक्षससङ्घाश्च समापेतुरनेकश:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनके यह कहते ही बहुत से वानर, भालू और राक्षस, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे, वहाँ आ पहुँचे ॥17॥
 
As soon as he finished speaking, a large number of monkeys, bears and demons, who could take any form at their will, arrived there. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)