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ramayan 7.108.14: 'रघु कुलनन्दन! मैं अपने दोनों पुत्रों का अभिषेक करके आई हूँ। हे राजन! मुझे भी अपने साथ चलने के लिए दृढ़ समझो।॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.108.14 
कृत्वाभिषेकं सुतयोर्द्वयो राघवनन्दन।
तवानुगमने राजन् विद्धि मां कृतनिश्चयम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'रघु कुलनन्दन! मैं अपने दोनों पुत्रों का अभिषेक करके आई हूँ। हे राजन! मुझे भी अपने साथ चलने के लिए दृढ़ समझो।॥14॥
 
‘Raghu Kulnandan! I have come after anointing both my sons. O King! Please consider me also to be determined to accompany you.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)