Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.108.13: पास जाकर उसने हाथ जोड़कर श्री रघुनाथजी को प्रणाम किया और धर्म का ध्यान करके तथा अपनी इन्द्रियों को वश में करके धर्म के ज्ञाता श्री रामजी से बोला-॥13॥ | ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पास जाकर उसने हाथ जोड़कर श्री रघुनाथजी को प्रणाम किया और धर्म का ध्यान करके तथा अपनी इन्द्रियों को वश में करके धर्म के ज्ञाता श्री रामजी से बोला-॥13॥
Going near, he bowed to Sri Raghunathji with folded hands and meditating on the Dharma and controlling his senses, he spoke to Sri Rama, the knower of the Dharma -॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥