Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.108.12: वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि महात्मा श्री राम अपने तेज से प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे हैं। उनके शरीर पर उत्तम रेशमी वस्त्र सुशोभित हैं और वे अमर महर्षियों के साथ बैठे हैं॥12॥ | ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ददर्श महात्मानं ज्वलन्तमिव पावकम्।
सूक्ष्मक्षौमाम्बरधरं मुनिभि: सार्धमक्षयै:॥ १२॥
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि महात्मा श्री राम अपने तेज से प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे हैं। उनके शरीर पर उत्तम रेशमी वस्त्र सुशोभित हैं और वे अमर महर्षियों के साथ बैठे हैं॥12॥
Reaching there he saw that Mahatma Shri Ram was glowing like a blazing fire with his own brilliance. Fine silken clothes were adorning his body and he was seated with the immortal Maharishis.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥