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ramayan 7.108.1: श्री रामचन्द्रजी की अनुमति पाकर वे शीघ्रतापूर्वक दूत मधुरापुरी की ओर चल पड़े। मार्ग में वे कहीं भी नहीं रुके॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.108.1 
ते दूता रामवाक्येन चोदिता लघुविक्रमा:।
प्रजग्मुर्मधुरां शीघ्रं चक्रुर्वासं न चाध्वनि॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी की अनुमति पाकर वे शीघ्रतापूर्वक दूत मधुरापुरी की ओर चल पड़े। मार्ग में वे कहीं भी नहीं रुके॥1॥
 
After receiving the permission of Shri Ramchandraji, the hasty messengers quickly left for Madhurapuri. He did not stop anywhere on the way. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)