Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.107.14: स्वामी! आप जहाँ भी जाएँ, चाहे आश्रम में जाएँ, चाहे दुर्गम स्थान पर, चाहे नदी में जाएँ, चाहे समुद्र में, हमें भी अपने साथ ले जाएँ। यदि आप हमें त्यागने योग्य न समझें, तो त्याग दें॥ 14॥ | ramayan सर्ग 7.107: वसिष्ठजी के कहने से श्रीराम का पुरवासियों को अपने साथ ले जाने का विचार तथा कुश और लव का राज्याभिषेक करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपोवनं वा दुर्गं वा नदीमम्भोनिधिं तथा।
वयं ते यदि न त्याज्या: सर्वान्नो नय ईश्वर॥ १४॥
अनुवाद
स्वामी! आप जहाँ भी जाएँ, चाहे आश्रम में जाएँ, चाहे दुर्गम स्थान पर, चाहे नदी में जाएँ, चाहे समुद्र में, हमें भी अपने साथ ले जाएँ। यदि आप हमें त्यागने योग्य न समझें, तो त्याग दें॥ 14॥
Swami! Wherever you go, whether to a hermitage or to some inaccessible place or to a river or the sea, take us along with you. If you do not consider us worthy of being abandoned, then do so.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥