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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 106: श्रीराम के त्याग देने पर लक्ष्मण का सशरीर स्वर्गगमन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.106.3 
जहि मां सौम्य विस्रब्धं प्रतिज्ञां परिपालय।
हीनप्रतिज्ञा: काकुत्स्थ प्रयान्ति नरकं नरा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! तुम बिना किसी हिचकिचाहट के मेरा वध करो और ऐसा करके अपनी प्रतिज्ञा पूरी करो। हे ककुत्स्थ! जो लोग अपनी प्रतिज्ञा भंग करते हैं, वे नरक में जाते हैं। 3.
 
Soumya! You should kill me without any hesitation and by doing so fulfil your promise. O Kakutstha! People who break their promises go to hell. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)