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ramayan 7.106.13: 'सुमित्रनन्दन! मैं आपका त्याग इसलिए करता हूँ कि धर्म नष्ट न हो। साधु का त्याग हो या मारा जाए - दोनों एक ही हैं।'॥13॥   |   ramayan सर्ग 7.106: श्रीराम के त्याग देने पर लक्ष्मण का सशरीर स्वर्गगमन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 106: श्रीराम के त्याग देने पर लक्ष्मण का सशरीर स्वर्गगमन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.106.13 
विसर्जये त्वां सौमित्रे मा भूद् धर्मविपर्यय:।
त्यागो वधो वा विहित: साधूनां तूभयं समम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'सुमित्रनन्दन! मैं आपका त्याग इसलिए करता हूँ कि धर्म नष्ट न हो। साधु का त्याग हो या मारा जाए - दोनों एक ही हैं।'॥13॥
 
‘Sumitra Nandan! I abandon you so that Dharma (righteousness) is not lost. Whether a saint is abandoned or killed - both are the same.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)