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ramayan 7.106.1: श्री रामजी राहु से पीड़ित चन्द्रमा के समान दुःखी हो गए थे। उन्हें दुःखी देखकर तथा सिर झुकाकर, लक्ष्मणजी ने बड़े हर्ष के साथ मधुर वचनों में कहा -॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.106: श्रीराम के त्याग देने पर लक्ष्मण का सशरीर स्वर्गगमन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 106: श्रीराम के त्याग देने पर लक्ष्मण का सशरीर स्वर्गगमन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.106.1 
अवाङ्मुखमथो दीनं दृष्ट्वा सोममिवाप्लुतम्।
राघवं लक्ष्मणो वाक्यं हृष्टो मधुरमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी राहु से पीड़ित चन्द्रमा के समान दुःखी हो गए थे। उन्हें दुःखी देखकर तथा सिर झुकाकर, लक्ष्मणजी ने बड़े हर्ष के साथ मधुर वचनों में कहा -॥1॥
 
Sri Rama had become as miserable as the moon affected by Rahu. Seeing him sad and with his head bowed down, Lakshmana said in sweet words with great joy -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)