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ramayan 7.105.16: जब ऋषि दुर्वासा अपने आश्रम चले गए, तब लक्ष्मण के बड़े भाई श्री राम काल के वचनों को याद करके दुःखी हो गए।   |   ramayan सर्ग 7.105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.105.16 
तस्मिन् गते मुनिवरे स्वाश्रमं लक्ष्मणाग्रज:।
संस्मृत्य कालवाक्यानि ततो दु:खमुपागमत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब ऋषि दुर्वासा अपने आश्रम चले गए, तब लक्ष्मण के बड़े भाई श्री राम काल के वचनों को याद करके दुःखी हो गए।
 
When the sage Durvasa left for his hermitage, Lakshman's elder brother Sri Rama became saddened by remembering the words of Kaal. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)