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ramayan 7.105.10: लक्ष्मण के वचन सुनकर राजा राम ने तुरन्त ही काल को विदा किया और बाहर जाकर अत्रिपुत्र दुर्वासा से मिले॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.105.10 
लक्ष्मणस्य वच: श्रुत्वा राम: कालं विसृज्य च।
नि:सृत्य त्वरितो राजा अत्रे: पुत्रं ददर्श ह॥ १०॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के वचन सुनकर राजा राम ने तुरन्त ही काल को विदा किया और बाहर जाकर अत्रिपुत्र दुर्वासा से मिले॥10॥
 
On hearing Lakshman's words, King Rama immediately bid farewell to Kaal and went out and met Atri's son Durvasa.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)