श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 104: कालका श्रीरामचन्द्रजी को ब्रह्माजी का संदेश सुनाना और श्रीराम का उसे स्वीकार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.104.3 
पितामहश्च भगवानाह लोकपति: प्रभु:।
समयस्ते कृत: सौम्य लोकान् सम्परिरक्षितुम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
लोकनाथ प्रभु भगवान पितामह ने कहा है कि 'सौम्य! तुमने लोकों की रक्षा करने का जो वचन दिया था, वह पूरा हो गया है॥3॥
 
Loknath Prabhu Lord Pitamah has said that 'Soumya! The promise you had made to protect the worlds has been fulfilled. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)