Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.104.13: हे पुरुषश्रेष्ठ! आप अपनी इच्छा से ही मनुष्य लोक में किसी के पुत्र रूप में प्रकट हुए हैं। इस अवतार में आपने जो आयु निश्चित की थी, वह पूरी हो चुकी है; अतः अब समय आ गया है कि आप हमारे निकट आएँ॥13॥ | ramayan सर्ग 7.104: कालका श्रीरामचन्द्रजी को ब्रह्माजी का संदेश सुनाना और श्रीराम का उसे स्वीकार करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स त्वं मनोमय: पुत्र: पूर्णायुर्मानुषेष्विह।
कालोऽयं ते नरश्रेष्ठ समीपमुपवर्तितुम्॥ १३॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आप अपनी इच्छा से ही मनुष्य लोक में किसी के पुत्र रूप में प्रकट हुए हैं। इस अवतार में आपने जो आयु निश्चित की थी, वह पूरी हो चुकी है; अतः अब समय आ गया है कि आप हमारे निकट आएँ॥13॥
‘O best of men! You have appeared in the human world as someone's son by your own will. The life span you had decided for yourself in this incarnation has been completed; hence it is now time for you to come closer to us.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥