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ramayan 7.103.8: अपने तेज से चमकते हुए रघुकुलतिलक श्री राम के पास पहुँचकर मुनि ने उनसे मधुर वाणी में कहा - 'रघुनन्दन! आप उठें॥8॥   |   ramayan सर्ग 7.103: श्रीराम के यहाँ कालका आगमन और एक कठोर शर्त के साथ उनका वार्ता के लिये उद्यत होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.103.8 
सोऽभिगम्य रघुश्रेष्ठं दीप्यमानं स्वतेजसा।
ऋषिर्मधुरया वाचा वर्धस्वेत्याह राघवम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अपने तेज से चमकते हुए रघुकुलतिलक श्री राम के पास पहुँचकर मुनि ने उनसे मधुर वाणी में कहा - 'रघुनन्दन! आप उठें॥8॥
 
Reaching Raghukultilak Shri Ram, who was shining with his brilliance, the sage said to him in a sweet voice - 'Raghunandan! May you rise. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)