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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 103: श्रीराम के यहाँ कालका आगमन और एक कठोर शर्त के साथ उनका वार्ता के लिये उद्यत होना
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श्लोक 15
श्लोक
7.103.15
स मे वध्य: खलु भवेद् वाचं द्वन्द्वसमीरितम्।
ऋषेर्मम च सौमित्रे पश्येद् वा शृणुयाच्च य:॥ १५॥
अनुवाद
सुमित्रानंदन! जो कोई मेरी और ऋषि की बातें सुनेगा अथवा हमारी बातें देखेगा, वह मेरे द्वारा मारा जाएगा॥15॥
Sumitra Nandan! Whoever hears what the sage and I say, or sees us talking, will be killed by me.'॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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