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ramayan 7.103.1: तदनन्तर, कुछ समय और व्यतीत होने पर जब भगवान् श्री राम धर्मपूर्वक अयोध्या राज्य का शासन कर रहे थे, तब साक्षात् काल एक तपस्वी का रूप धारण करके राजमहल के द्वार पर आया॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.103: श्रीराम के यहाँ कालका आगमन और एक कठोर शर्त के साथ उनका वार्ता के लिये उद्यत होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.103.1 
कस्यचित् त्वथ कालस्य रामे धर्मपरे स्थिते।
कालस्तापसरूपेण राजद्वारमुपागमत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, कुछ समय और व्यतीत होने पर जब भगवान् श्री राम धर्मपूर्वक अयोध्या राज्य का शासन कर रहे थे, तब साक्षात् काल एक तपस्वी का रूप धारण करके राजमहल के द्वार पर आया॥1॥
 
Thereafter, after some more time passed, when Lord Shri Ram was religiously ruling the kingdom of Ayodhya, Sakshat Kaal came to the door of the royal palace in the form of an ascetic. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)