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ramayan 7.102.5: श्री रामचन्द्रजी के ऐसा कहने पर भरत ने उत्तर दिया - 'आर्य! यह कारूपथ नामक देश अत्यंत सुन्दर है। वहाँ किसी भी प्रकार के रोग का भय नहीं है।॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.102: श्रीराम की आज्ञा से भरत और लक्ष्मण द्वारा कुमार अङ्गद और चन्द्रकेतु की कारुपथ देश के विभिन्न राज्यों पर नियुक्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.102.5 
तथोक्तवति रामे तु भरत: प्रत्युवाच ह।
अयं कारुपथो देशो रमणीयो निरामय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के ऐसा कहने पर भरत ने उत्तर दिया - 'आर्य! यह कारूपथ नामक देश अत्यंत सुन्दर है। वहाँ किसी भी प्रकार के रोग का भय नहीं है।॥5॥
 
When Shri Ramchandraji said this, Bharata replied - 'Arya! This country called Karupath is very beautiful. There is no fear of any kind of disease there. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)