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ramayan 7.101.2: केकयनराज बहुत बड़ी भीड़ के साथ चल पड़े और भरत से मिलकर बड़ी शीघ्रता से गंधर्वों के देश की ओर चल पड़े, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते हैं॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.101.2 
स निर्ययौ जनौघेन महता केकयाधिप:।
त्वरमाणोऽभिचक्राम गन्धर्वान् कामरूपिण:॥ २॥
 
 
अनुवाद
केकयनराज बहुत बड़ी भीड़ के साथ चल पड़े और भरत से मिलकर बड़ी शीघ्रता से गंधर्वों के देश की ओर चल पड़े, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते हैं॥ 2॥
 
The king of Kekayan set out with a large crowd and after meeting Bharata, proceeded in great haste towards the country of the Gandharvas, who can assume any form at will.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)