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शशंस च यथावृत्तं गन्धर्ववधमुत्तमम्।
निवेशनं च देशस्य श्रुत्वा प्रीतोऽस्य राघव:॥ १८॥
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने गन्धर्वों के वध और उस देश की उत्तम प्रजा का सत्य समाचार सुनाया। यह सुनकर श्री रघुनाथजी उस पर अत्यन्त प्रसन्न हुए॥18॥
Thereafter he narrated the true news of the killing of the Gandharvas and the good population of that country. On hearing this, Shri Raghunathji became very pleased with him.॥ 18॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकाधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०१॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें एक सौ एकवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥