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ramayan 7.101.1: जब केकयराज युधाजित् ने सुना कि भरत स्वयं सेनापति बनकर गार्ग्य ऋषि के साथ आ रहे हैं, तब वे बहुत प्रसन्न हुए ॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.101.1 
श्रुत्वा सेनापतिं प्राप्तं भरतं केकयाधिप:।
युधाजिद् गार्ग्यसहितं परां प्रीतिमुपागमत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब केकयराज युधाजित् ने सुना कि भरत स्वयं सेनापति बनकर गार्ग्य ऋषि के साथ आ रहे हैं, तब वे बहुत प्रसन्न हुए ॥1॥
 
When King Yudhajit of Kekaya heard that Bharata himself was arriving as the Commander-in-Chief along with the sage Gargya, he became very happy. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)